badri narayan ji sodhani

श्री बद्री नारायण सोढाणी

श्री बद्री नारायण सोढाणी जिन्होने श्री कल्याण आरोग्य सदन की स्थापना से लेकर इसके विकास पर पूरा जीवन समर्पित कर दिया ताकि हर एक निर्धन और पीड़ित की मदद हो सके |

श्री बद्री नारायण सोढाणी ने सन् 1944 से शल्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन शुरू किया था पूरे सीकर शहर मे ताकि ज़्यादा से ज़्यादा ग़रीब और पीड़ितो को राहत मिल सकें, लेकिन जब उन्हे पता चला की पीड़ितों मे अधिक संख्या मे क्षय रोग से ग्रसित पीड़ित आ रहे हैं और हमारे शिविर के डॉक्टर उन मरीजों से यह कहते की आपका ईलाज यहाँ नही हो सकता उन्हे इसके लिए कही ओर जाना पड़ेगा तो श्री बद्री नारायण सोढाणी ने सोचा की क्यूना यही सीकर मे एक क्षय अस्पताल बन जाए तो लोगो को यहाँ वहाँ भटकना नही पड़े |

और इस विचार को उन्होने एक दिन सीकर के राव राजा श्री कल्याणसिंह जी के सामने रखा और चिकित्सालय के लिए सीकर से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित साँवली कोठी और कुछ ज़मीन की माँग की, जिसके लिए उन्होने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी |

और इस तरह शहर के प्रमुख व्यक्तियों की सलाह से एक संस्था बनाई गई जिसका नाम “श्री कल्याण आरोग्य सदन” रखा गया और उसे 06 जनवरी, 1958 को सोसाइटिज एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड करवा लिया गया |

श्री बद्री नारायण सोढाणी ने प्रथम मंत्री पद का और श्री भागीरथ कानोडिया ने प्रथम अध्यक्ष पद का भार संभाला |
उस समय केवल 68 रुपये ही श्री बद्री नारायण सोढाणी के पास थे | लेकिन ज्यों ज्यों भवन निर्माण कार्य बढ़ता गया त्यों त्यों उदारमना दाताओं से सहयोग मिलता गया |

श्री बद्री नारायण सोढाणी ने अपनी एक परोपकारी सोच को अपने कर्मो के माध्यम से साकार कर दिखाया | और इस सेवा संस्थान की नींव रख कर भरपूर प्रयास किया ताकि आने वाले वक्त मे किसी भी क्षय रोगी को या किसी अन्य बीमार, ग़रीब, पीड़ित को किसी भी अभाव मे दर दर भटकना ना पड़े और उसकी नि:शुल्क सहायता हो जाएँ |

समयानुसार हर एक व्यक्ति इस सेवा संस्थान से जुड़ता गया और श्री बद्री नारायण सोढाणी के द्वारा शुरू किया गया काम आगे बढ़ाने मे अपने तन मन से जुड़ता गया |